नवीनतम समाचार वनोपजों के संग्रहण एवं व्यापार से वनवासियों को लाभ दिलाने की दृष्टि से वर्ष 1984 में मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित का गठन हुआ था। English Version
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मध्यप्रदेश राज्य लघु वन उपज फेडरेशन  के बारे में
वनोपजों के संग्रहण एवं व्यापार से वनवासियों को लाभ दिलाने की दृष्टि से वर्ष 1984 में मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित का गठन हुआ था। उक्त संघ प्रदेश के विभिन्न जिलों की प्राथमिक वनोपज सहकारी समितिओं के माध्यम किये जा रहे तेन्दूपत्ता, सालबीज एवं कुल्लू गोंद के व्यापार का समन्वय करता है तथा इन उत्पादों के निर्वर्तन की भी व्यवस्था करता है। इसके अतिरिक्त अन्य अकाष्ठीय वन उपजों का संग्रहण एवं व्यापार भी इन प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों द्वारा किया जा रहा है। म.प्र.राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ शहद तथा अन्य हर्बल उत्पादों का प्रसंस्करण एवं विपणन का कार्य भी ‘‘विन्ध्य हर्बल्स’’ ब्राण्ड के अंतर्गत करता है। भोपाल में बी.एच.ई.एल. के समीप वन परिसर, बरखेड़ा पठानी में लघु वन उपज प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केन्द्र (एम.एफ.पी.पार्क) के नाम से प्रसंस्करण एवं अनुसंधान कार्य हेतु एक यूनिट की स्थापना भी की गई है। इसके अतिरिक्त रेहटी (सिहोर), बरमान (नरसिंहपुर), कटनी, पन्ना एवं देवास में भी प्रसंस्करण केन्द्र कार्यरत हैं । ये ईकाईयां भी ‘‘विन्ध्य हर्बल्स्’’ ब्राण्ड हेतु उत्पाद तैयार कर रही है। छिंदवाड़ा एवं रीवा में भी ‘हर्बल प्रसंस्करण केन्द्रों की स्थापना का कार्य प्रगति पर है।
संविधान के 73वें संषोधन मे पंचायती राज संस्थाओं को अधिकारों के विकेन्द्रीयकरण का प्रावधान किया गया । संसद द्वारा वर्ष 1996 मे पंचायत उपबंध; अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तारद्ध अधिनियम पारित किया गया, जिसके अन्तर्गत उचित स्तर पर पंचायतों को लघु वनोपजों का स्वामित्व प्रदान करने का प्रावधान किया गया है । इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने वाला मध्य प्रदेष देष का पहला राज्य है । मध्य प्रदेष षासन द्वारा वर्ष 1998 मे लघु वनोपजों की समस्त षुद्ध आय प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों को हस्तान्तिरत करने का निर्णय लिया गया था । समितियां इसष्षुद्ध आय का निम्नानुसार वितरण कर रही हैं:-
1. 60 प्रतिषत लघु वनोपज संग्राहकों को
2. 20 प्रतिषत वनोपजों के विकास एवं वनों के पुनरुत्पादन हेतु
3. शेष ग्रामीण संसाधन विकास अथवा नगद वितरण
यह व्यवस्था वर्ष 1998-99 से लागू है ।
 
अकाष्ठीय वनोपज व्यापार का क्रियाषील ढांचा
लघु वनोपज व्यापार का क्रियाषील ढांचा
लघु वनोपज संग्रहण एवं व्यापार के क्रियान्वयन हेतु स्थापित त्रि-स्तरीय संरचना के शीर्ष स्तर पर मध्य प्रदेश राज्य लघु वनोपज, व्यापार एवं विकासद्ध सहकारी संघ कार्यरत् है । मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 1988 मे लघु वनोपज के संग्रहण, भण्डारण एवं व्यापार से बिचैलियों को पूर्णतः समाप्त करने एवं वास्तविक संग्राहण कर्ताओं की सहकारी संस्थाओं के गठन का निर्णय लिया गया ।
इस निर्णय को कार्य रूप देने के लिये एक त्रि-स्तरीय संरचना का निर्माण किया गया । इस संरचना के प्राथमिक स्तर पर वास्तविक संग्राहकों की सदस्यता से 1947 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियां गठित की गईं । इन समितियों के अध्यक्ष सदस्यों मे से ही चयनित किये गये । कालान्तर मे इन प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के चुनाव आयोजित किये गये । राज्य के पुनर्गठन के उपरान्त, नवीन मध्य प्रदेश राज्य मे 1066 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियां कार्यरत् हैं ।
द्वितीय स्तर पर जिलाध्यक्ष की अध्यक्षता मे 44 जिला वनोपज सहकारी संघ गठित किये गये । समय-समय पर इनकी संख्या मे वृद्धि की गई । वर्तमान मे 60 जिला वनोपज सहकारी संघ कार्यरत् हैं । अधिकांष जिला संघों के चुनाव हो चुके हैं एवं इनमे चुने हुये अध्यक्ष कार्यरत् हैं ।
मध्य प्रदेश राज्य लघु वनोपज व्यापार एवं विकास सहकारी संघ, जिसका गठन वर्ष 1984 मे किया गया था, इस संरचना के शीर्षस्थ स्तर पर है । वर्तमान मे इस संघ मे भी चुना हुआ संचालक मण्डल एवं चुने हुये अध्यक्ष कार्यरत् है ।
 
 
 
 
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